ऑस्कर विजेता महान संगीतकार ए. आर. रहमान इस दिनों चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार उनके लिए बात उनकी संगीत कला की नहीं, बल्कि एक बयान के कारण विवाद में बदली है। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में रहमान ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में सांप्रदायिकता का ज़िक्र किया था और यह कहा था कि पिछले लगभग आठ वर्षों में उन्हें कम काम मिलने का एक कारण यह भी हो सकता है कि इंडस्ट्री में पावर शिफ्ट और सांप्रदायिक ढांचा अधिक प्रबल हो गया है। इस बयान ने सोशल मीडिया और बॉलीवुड जगत में तीव्र प्रतिक्रिया और आलोचना को जन्म दिया।
📌 विवाद कैसे शुरू हुआ?
रहमान ने एक बातचीत में कहा कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें बॉलीवुड में कम काम मिलने के बारे में कई बातें सुनी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह “सांप्रदायिक रूप से विभाजित बदलती सोच” का परिणाम हो सकता है — हालांकि उन्होंने कहा कि यह अनुभव उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सीधा महसूस नहीं किया, बल्कि यह ‘चायनीज़ व्हिस्पर’ (आवाज़ें) के रूप में आया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें हायर करने की बात की, लेकिन अंत में कुछ और फैसले किए गए।
साथ ही, उन्होंने विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह एक विभाजनकारी (divisive) फिल्म है — जो और विवादित प्रतिक्रियाओं को जन्म देने लगी।
इसी वजह से सोशल मीडिया पर आलोचना भड़क उठी और कुछ लोगों ने उन्हें “सांप्रदायिक भावना फैलाने वाला” बताया, जबकि अन्य ने यह भी कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
🙌 बच्चों का समर्थन — तर्क, भावनाएँ और संदेश
जैसे ही विवाद गर्माया, ए. आर. रहमान के बच्चे — बेटे अमीन और बेटियाँ खातिज़ा तथा रहीमा — सोशल मीडिया पर सामने आए और पिता का खुलकर समर्थन किया।
📌 1. अमीन की प्रतिक्रिया
उनके सबसे बड़े बेटे अमीन रहमान ने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के ज़रिए अपने पिता के गौरवपूर्ण पल साझा किए — जिसमें:
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रहमान को एक बड़े स्टेडियम में दर्शकों के बीच जय हो के साथ दिखाया गया,
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वह हजारों प्रशंसकों के साथ सेल्फ़ी लेते हुए दिखाई दिए,
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ सम्मान समारोह में ख़ुद को प्रस्तुत करते हुए दिख रहे हैं,
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कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन के साथ वंदे मातरम गाते हुए क्लिप शामिल हैं,
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनकी तारीफ करते हुए एक वीडियो भी साझा किया गया।
इन सभी दृश्यों को शेयर करके अमीन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि रहमान ने न सिर्फ़ भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भारतीय संगीत और संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया है।
📌 2. बेटियों खातिज़ा और रहीमा की प्रतिक्रिया
रहीमा ने सोशल मीडिया पर एक गंभीर और मार्मिक संदेश साझा किया जिसमें लिखा था:
“वे लोग भगवद गीता, कुरान या बाइबिल तक नहीं पढ़ते — जो प्रेम, शांति, अनुशासन और सत्य सिखाते हैं —
लेकिन उनके पास एक दूसरे का मज़ाक उड़ाने, बहस करने, भड़काने, गाली देने और एक दूसरे का अनादर करने का पूरा समय है।”
उन्होंने आगे लिखा:
“ये धर्म नहीं है — यह तो अंधी सोच, अधूरी शिक्षा, जहरीली राजनीति और ख़राब परवरिश का नतीजा है —
एक ऐसी पीढ़ी जो इंसानियत से ज़्यादा नफ़रत के प्रति वफ़ादार है।”
खातिजा ने भी पिता की उपलब्धियों और उनके प्रतिष्ठित पलों को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि बहुत से लोग उनके पिता के वास्तविक संघर्ष और कलाकार के योगदान को नहीं समझ रहे हैं।
🔍 समाज व बड़े कलाकारों की प्रतिक्रिया
विवाद पर कुछ वरिष्ठ कलाकारों और फिल्म निर्माताओं ने भी अपनी राय रखी है।
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फिल्म निर्माता इम्तियाज़ अली ने कहा कि वह नहीं मानते कि फिल्म इंडस्ट्री में सांप्रदायिक भेदभाव है, और हो सकता है कि रहमान के शब्दों को गलत तरीके से समझा या प्रस्तुत किया गया हो।
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गीतकार जावेद अख़्तर समेत कुछ आलोचकों ने कहा कि रहमान के काम और ओवरऑल इंडस्ट्री में उनके सम्मान का ध्यान रखते हुए वास्तविक समस्या को अलग ढंग से देखने की ज़रूरत है।
इसी बीच, कई अन्य संगीतकार और कलाकार रहमान के समर्थन में यह भी कह चुके हैं कि बहस करना ठीक है, पर व्यक्तिगत अपशब्द और घृणा फैलाना अनुचित है।
🎶 रहमान की खुद की सफ़ाई
कुछ आलोचना के बाद ए. आर. रहमान ने स्वयं एक वीडियो बयान जारी करके स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ही उनकी प्रेरणा, गुरु और घर रहा है, और उनका उद्देश्य विभाजन फैलाना नहीं, बल्कि संगीत के ज़रिये लोगों को जोड़ना रहा है।
⭐ निष्कर्ष
यह विवाद केवल एक बयान पर बहस नहीं रह गया — बल्कि आज सोशल मीडिया, कला, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक प्रतिक्रिया की शक्ति के बीच एक ऐसी लड़ाई का प्रतीक बन चुका है जहाँ:
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एक प्रतिष्ठित संगीतकार की भावना,
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उनके परिवार का प्यार और समर्थन, तथा
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प्रतिक्रिया की सीमाएँ
सब मिलकर यह दिखाती हैं कि हमारी सार्वजनिक बातचीत अब कितनी भावनात्मक, तीव्र और बहुआयामी बन चुकी है।
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