‘इक्कीस’ एक युद्ध‑आधारित ड्रामा फिल्म है, जिसे श्रीराम राघवन ने निर्देशित किया है। यह फिल्म सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची वीरता की कहानी पर आधारित है — जिन्होंने 1971 के भारत‑पाकिस्तान युद्ध में सबसे कम उम्र (21 वर्ष) में परम वीर चक्र जीता था।
📌 कहानी (Story)
फिल्म दो समय‑रेखाओं में चलती है:
पहली में हम अरुण खेत्रपाल को युवा सैनिक के रूप में देखते हैं — उसका प्रशिक्षण, दोस्ती, पहली प्रेम कहानी और युद्ध की तैयारियाँ। दूसरी में एक जवान से बुड्ढे पिता की यात्रा दिखाई जाती है, जो अपने बेटे की वीरता के निशानों को ढूँढने पाकिस्तान तक जाता है।
कहानी युद्ध के मैदान की रोमांचक झलकियाँ और सैनिकों की मनोस्थिति दोनों को बखूबी दिखाती है, मगर यह सिर्फ लड़ाई नहीं है — फिल्म युद्ध के डर, मानव दर्द और उस युद्ध के बाद भी बची इंसानियत को सामने लाती है।
🎭 पर्फ़ॉर्मेंस और कलाकार
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धर्मेंद्र की भूमिका फिल्म की सबसे खास बात है — यह उनकी आखिरी स्क्रीन उपस्थिति भी है, जो दर्शकों के दिलों को छू जाती है। उनके भावनात्मक अभिनय में दर्द और गरिमा दोनों हैं।
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अगस्त्य नंदा (अरुण के रूप में) ने सहज और ईमानदार प्रदर्शन दिया है, हालांकि कुछ हिस्सों में थोड़ा अभिनय की गहराई कमी होती दिखती है।
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जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया और सहयोगी कलाकारों ने भी फिल्म को मजबूती दी है।
🎬 निर्देशन और तकनीक
श्रीराम राघवन ने इस बार थ्रिलर शैली से हटकर दो दिलचस्प लेकिन चुनौतीपूर्ण समय‑रेखाएँ संभाली हैं। फिल्म निर्देशक की शैली की अपेक्षा थोड़ी धीमी और भावुक है — जो कुछ दर्शकों को पसंद आई है, तो कुछ ने इसे धीमा बताया है।
युद्ध के दृश्यों में CGI और भारी धमाकों पर कम भरोसा किया गया है, जिससे फिल्म यथार्थ‑अनुरूप और भावनात्मक रूप से गहरी महसूस होती है।
🎧 म्यूज़िक और भावनात्मक स्वर
फिल्म में गाने और बैकग्राउंड स्कोर सधे हुए हैं — खासकर रोमांटिक और शांति‑पूर्ण हिस्सों में — लेकिन कुल मिलाकर म्यूज़िक का प्रभाव कुछ ज़्यादा यादगार नहीं रहता।
💡 फिल्म के पॉइंट्स
खूबियाँ:
✔️ युद्ध को एक मानव‑केंद्रित दृष्टिकोण से दिखाना
✔️ धर्मेंद्र का आख़िरी और भावनात्मक प्रदर्शन
✔️ दो समय‑रेखाओं का मिश्रण
✔️ अरुण खेत्रपाल की वीरता का सम्मान
कमियाँ:
❌ कहानी की चाल कुछ हिस्सों में धीमी
❌ मुख्य हीरो के अभिनय में कभी‑कभी भाव की गहराई कमी
❌ रोमांस और प्लॉट का मेल कुछ दर्शकों को कमजोर लगा
📊 अंतिम फैसला (Verdict)
‘इक्कीस’ सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं है — यह एक भावनात्मक, इंसानियत‑केंद्रित युद्ध कथा है जो शौर्य, दर्द और युद्ध की मानसिकता को शांत और संवेदनशील तरीके से पेश करती है। यह फिल्म उन लोगों के लिए खास है जो सरल जज़्बात, सैनिकों की ज़िंदगी और युद्ध का भावुक पक्ष देखना चाहते हैं।
⭐ रेटिंग: 3/5
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